अनुसूचित जनजातियों के विकास में आर्थिक संस्थाओं की भूमिका
Keywords:
अनुसूचित जनजाति, संस्था, विकास, एमएसपी, एमएफपी।Abstract
प्रस्तुत शोधपत्र में अनुसूचित जनजातियों के विकास में आर्थिक संस्थाओं की भूमिका का अध्ययन किया गया है। भारत की लगभग 8.6% जनसंख्या अनुसूचित जनजातियों से संबंधित है, जो विकास की मुख्यधारा से काफी हद तक पीछे रह गई है। इस पिछड़ेपन के पीछे शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी ज्ञान और वित्तीय संसाधनों की सीमित पहुँच जैसी अनेक चुनौतियाँ हैं। शोधपत्र में यह विवेचना द्वितीयक आकड़ों के आधार पर की गई है कि किस प्रकार बैंकिंग संस्थाएँ, वित्तीय निगम, नीति आयोग, वित्त आयोग और विशेष रूप से TRIFED तथा NSTFDC जैसी संस्थाएँ जनजातीय समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में योगदान देती हैं। शोधपत्र 2024 में अर्थशास्त्र में जिस कार्य को नोबल पुरुस्कार मिला उसे समकालीन विशिष्ट अकादमिक परामर्श के रूप में जनजातीय समाज की आर्थिक विषमताओं के समाधान के रूप में विभिन्न आर्थिक संस्थओं की भोमिका मका अध्ययन करता है तथा निष्कर्ष में बताया गया है कि समावेशी संस्थाएँ दीर्घकालीन विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं। अतः जनजातीय समाज के लिए समावेशी आर्थिक संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण अत्यंत आवश्यक है।
