बौद्ध धर्म में प्रव्रज्यित एवम् भिक्षुणी गणिकाएं
Keywords:
बौद्ध धर्म, प्रव्रज्यित, भिक्षुणी गणिकाएंAbstract
प्राचीन भारतीय समाज में स्त्रियों का स्थान आदर्शात्मक तथा सम्मान जनक था। समाज के बदलते स्वरुप के साथ स्त्रियों की दशा में उतार चढ़ाव होते रहे, चूंकि भारत एक विशाल राष्ट्र है। देश के अलग अलग भागों में वहां की भौगोलिक परिस्थिति के अनुरुप, तो कभी अर्थव्यवस्था भी राजनीतिक स्थिति का मापदंड रही और यही कारण समाज के परिवर्तनशीलता के आधार बने। स्त्री मां, बहन, पुत्री तथा पत्नी के रुप में प्रतिष्ठित होती है परन्तु स्त्री की एक श्रेणी ऐसी भी है जो समाज निर्मित होते हुए भी गर्भित मानी गई है। प्राचीन काल में स्त्रियों की एक ऐसी श्रेणी थी। जो उच्च जाति की पत्नी की स्वतंत्रता को सीमित करने वाले नियमों से नहीं बंधी थी। वह गणिका रूपाजीवा अथवा वेश्या कहलाती थीं। निश्चित रूप से अनेक निर्धन तथा साधारण वेश्याएं होती थीं। जिनका जीवन भिक्षाटन अथवा निम्न स्तर का कार्य करने में व्यतीत होता था।परन्तु साहित्य में वर्णित वेश्याएं विशेष रुप से सुंदर,निपुण तथा धनी होती थीं प्रसिद्ध तथा सम्मान की पात्री होती थीं।
