श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित अहिंसक युद्ध

Authors

  • Dr. Dilip Kumar Das Author

Keywords:

भगवद्गीता, भीष्मपर्व, अहिंसक युद्ध, दैवी सम्पद, आसुरी सम्पद, आत्मसंघर्ष

Abstract

भारतीय दार्शनिक परम्परा में व्यासदेव विरचित महाभारत के अन्तर्गत श्रीमद्भगवद्गीता एक लघु अंश होते हुए भी अत्यन्त महत्वपूर्ण ग्रन्थ है, जिसमें ज्ञान, कर्म, भक्ति तथा उपासना-योग के माध्यम से आध्यात्मिक जीवन के गूढ़ सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया गया है। सामान्यतः गीता को महाभारत के कुरुक्षेत्र में सम्पन्न ऐतिहासिक युद्ध की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत किया गया ग्रन्थ माना जाता है। तथापि गीता में वर्णित युद्ध का अर्थ केवल बाह्य या भौतिक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें गहन दार्शनिक संकेत भी निहित हैं। प्रस्तुत शोधपत्र में भगवद्गीता के आधार पर ‘अहिंसक युद्ध’ की अवधारणा का विश्लेषण किया गया है। विशेषतः दैवी और आसुरी प्रवृत्तियों के मध्य होने वाले आन्तरिक संघर्ष को गीता के युद्ध का वास्तविक स्वरूप मानने का प्रयास किया गया है। महात्मा गान्धी तथा स्वामी अड़गड़ानन्द जैसे चिन्तकों की व्याख्याओं के आलोक में यह प्रतिपादित किया गया है कि गीता का युद्ध मानव के अन्तःकरण में स्थित दैवी एवं आसुरी शक्तियों के मध्य होने वाला संघर्ष है।

Author Biography

  • Dr. Dilip Kumar Das

    Classical Teacher, Town Government Girls High School, Bhawanipatna, Kalahandi, Odisha, India

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Published

2026-03-17

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Section

Articles

How to Cite

श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित अहिंसक युद्ध. (2026). Shodh Patra: International Journal of Multidisciplinary Studies, 48-53. https://shodhpatra.in/index.php/files/article/view/95

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