प्राचीन ज्ञान और आधुनिक शासन: कौटिल्य के अर्थशास्त्र की प्रासंगिकता

Authors

  • डॉ. अविनाश होता Author

Keywords:

कौटिल्य अर्थशास्त्र, आर्थिक नीति, आधुनिकता, प्रासंगिकता

Abstract

तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास रचित कौटिल्य का अर्थशास्त्र, शासन कला, आर्थिक नीति, सैन्य रणनीति और शासन पर एक प्राचीन ग्रंथ है। सदियों पुराना होने के बावजूद, इसके सिद्धांत आधुनिक नीतिगत ढाँचों के लिए अद्भुत प्रासंगिकता प्रदर्शित करते हैं। यह शोध पत्र इस बात का अन्वेषण करता है कि कराधान, विनियमन, भ्रष्टाचार-निरोध, आर्थिक शासन, विदेश नीति और सतत विकास पर कौटिल्य की अंतर्दृष्टि भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था के समकालीन शासन मॉडलों और आर्थिक रणनीतियों के साथ कैसे प्रतिध्वनित होती है।यह पत्र अर्थशास्त्र के सिद्धांतों जैसे 'सप्तांग सिद्धांत', 'मंडल सिद्धांत' और 'मत्स्यन्याय' और कल्याणकारी अर्थशास्त्र, नियामक राज्य, सुशासन और भू-राजनीतिक रणनीतियों जैसी आधुनिक अवधारणाओं के बीच तुलनात्मक विश्लेषण करता है। इसके अतिरिक्त, यह मूल्यांकन करता है कि संसाधन प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर प्राचीन नीति तंत्र वर्तमान सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के साथ कैसे संरेखित होते हैं तथा भारत में अंतर्जात राजनीतिक-सांस्कृतिक संसाधनों—जिसमें कौटिल्य भी शामिल हैं—के सक्रिय 'पुनः उपयोग' के संकेत देते हैं।। सैद्धांतिक और विश्लेषणात्मक पद्धति के माध्यम से, इस शोधपत्र का उद्देश्य कौटिल्य के अर्थशास्त्र के स्थायी ज्ञान और आधुनिक नीतिगत चुनौतियों के लिए इसकी प्रयोज्यता को रेखांकित करना है, तथा नीति निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और शासन विद्वानों के लिए मूल्यवान सबक प्रदान करना है।

Author Biography

  • डॉ. अविनाश होता

    Assistant Professor (Guest), Likhan Sai Govt. College Tapkara, Jashpur (C.G.)

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Published

2025-11-20

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How to Cite

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक शासन: कौटिल्य के अर्थशास्त्र की प्रासंगिकता. (2025). Shodh Patra: International Journal of Multidisciplinary Studies, 2(1), 760-770. https://shodhpatra.in/index.php/files/article/view/85

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