सिंधु-सरस्वती सभ्यता में नगर नियोजन एवं जल प्रबंधन प्रणाली: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • किरन सरोहा Author

Keywords:

सिंधु-सरस्वती सभ्यता, नगर नियोजन, जल प्रबंधन, धौलावीरा, हड़प्पा सभ्यता, जलाशय प्रणाली, प्राचीन अभियांत्रिकी

Abstract

सिंधु-सरस्वती सभ्यता (लगभग 3300-1300 ईसा पूर्व) प्राचीन विश्व की सबसे विकसित नगरीय सभ्यताओं में से एक मानी जाती है, जिसने मिस्र और मेसोपोटामिया की समकालीन सभ्यताओं से भी अधिक विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में अपना प्रभाव स्थापित किया।[1] यह शोध पत्र सिंधु-सरस्वती सभ्यता की नगर नियोजन पद्धति एवं जल प्रबंधन प्रणाली का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धौलावीरा, कालीबंगा, लोथल और राखीगढ़ी जैसे प्रमुख पुरातात्विक स्थलों के साक्ष्यों के आधार पर यह पत्र दर्शाता है कि इस सभ्यता के नगर-नियोजक ग्रिड-पद्धति, मानकीकृत ईंटों, भूमिगत जल-निकासी प्रणाली तथा वर्षा-जल संचयन की अत्यंत परिष्कृत तकनीकों से परिचित थे।[2] विशेष रूप से धौलावीरा की बहु-स्तरीय जलाशय प्रणाली को विश्व की प्राचीनतम अभियांत्रिकीय जल-संचयन व्यवस्थाओं में गिना जाता है।[3] यह अध्ययन विभिन्न विद्वानों के दृष्टिकोणों—विशेषकर सरस्वती नदी की पहचान, सभ्यता के पतन के कारण तथा नगर-नियोजन की सामाजिक-राजनीतिक व्याख्या—का तुलनात्मक विश्लेषण भी करता है। निष्कर्षतः यह पत्र स्थापित करता है कि सिंधु-सरस्वती सभ्यता की जल-प्रबंधन दक्षता केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, अपितु एक समग्र पारिस्थितिक-सामाजिक दृष्टिकोण की परिचायक थी, जिससे समकालीन जल-संकटग्रस्त शहरी नियोजन के लिए भी महत्त्वपूर्ण शिक्षाएँ प्राप्त होती हैं।

 

Author Biography

  • किरन सरोहा

    प्राध्यापिका, इतिहास विभाग, शहीद दलबीर सिंह राजकीय महाविद्यालय, खरखौदा, सोनीपत

     

Downloads

Published

2024-12-16

Issue

Section

Articles

How to Cite

सिंधु-सरस्वती सभ्यता में नगर नियोजन एवं जल प्रबंधन प्रणाली: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. (2024). Shodh Patra: International Journal of Multidisciplinary Studies, 1(1), 218-235. https://shodhpatra.in/index.php/files/article/view/134

Similar Articles

1-10 of 49

You may also start an advanced similarity search for this article.