बचपन में मानसिक आघात और उसके दीर्घकालीन प्रभाव

Authors

  • बबीता कुमारी Author

Keywords:

बाल आघात, ACEs, PTSD, न्यूरोबायोलॉजी, दीर्घकालीन प्रभाव, TF-CBT, बाल मनोविज्ञान, भारतीय संदर्भ, मानसिक स्वास्थ्य

Abstract

बचपन में अनुभव किया गया मानसिक आघात व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन पर गहरा और स्थायी प्रभाव डालता है। यह शोध पत्र बचपन में हुए प्रतिकूल अनुभवों (Adverse Childhood Experiences - ACEs) के न्यूरोबायोलॉजिकल, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और शारीरिक दीर्घकालीन प्रभावों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। शोध में पाया गया कि बचपन में अनुभव किया गया आघात मस्तिष्क के विकास को बाधित करता है, विशेषकर अमिग्डाला, हिप्पोकैम्पस और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को, जो भावना नियंत्रण, स्मृति और निर्णय-क्षमता के लिए उत्तरदायी हैं। यह शोध भारतीय संदर्भ में बाल आघात की व्यापकता, उसके कारण, प्रभाव और उपचार-पद्धतियों की समीक्षा प्रस्तुत करता है। प्रमुख निष्कर्षों में यह तथ्य सामने आए कि उच्च ACE स्कोर वाले व्यक्तियों में PTSD, अवसाद, चिंता विकार, मादक द्रव्य सेवन, हृदय रोग और आत्महत्या का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इस शोध में Trauma-Focused Cognitive Behavioral Therapy (TF-CBT), EMDR, खेल-चिकित्सा और भारतीय पारंपरिक उपचार पद्धतियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन भी किया गया है।

Author Biography

  • बबीता कुमारी

    शोध छात्रा, स्नातकोत्तर मनोविज्ञान बिभाग, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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Published

2026-04-11

Issue

Section

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How to Cite

बचपन में मानसिक आघात और उसके दीर्घकालीन प्रभाव. (2026). Shodh Patra: International Journal of Multidisciplinary Studies, 111-124. https://shodhpatra.in/index.php/files/article/view/100

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